Father's Day: जनस थ सहर क दरकर छड उनहन ह बच बजर अब त वदध आशरम ह परवर
जिन बेटे-बेटियों को नाजों से पाला, कभी कोई तकलीफ नहीं होने दी, जिनसे आस थी कि वह बुढ़ापे की लाठी बनेंगे, लेकिन उन्होंने ही जिंदगी भर की जमापूंजी बांट घर से निकाल दिया। अपनों ने किनारा किया तो वृद्ध आश्रम में सहारा मिला और अब तो यही इनका परिवार है।
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